yayawar । यायावर
शाश्वत सत्य की खोज में ...
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Mar 30, 2016
गेहूँ की बाली
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फागुन के किसी एक दिन खेत में खड़ी अनगिनत गेहूँ की बालियों में से गेहूँ की एक बाली अपनी सृजन क्षमता को जान बैठी उसने जाना कि वह एक सर्जक...
2 comments:
Mar 5, 2016
पुस्तक समीक्षा : गुलज़ार द्वारा रचित 'पुखराज'
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बहुत वर्ष पहले विविध भारती के एक कार्यक्रम में प्रस्तोता ने गुलज़ार की तारीफ करते हुए उनके बारे में कहा था कि गुलज़ार की कविताओं में बहुत सा...
Feb 9, 2016
कुछ बात करते हैं
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रोज़मर्रा की बातों से अलग कुछ बात करते हैं चलो आज बिना बात ही कुछ बात करते हैं। क़िताबों के बीच वो अब भी महक उठता है सूखा फूल जिससे कभी ...
Jan 3, 2016
बहुत से पर्चे और थोड़ी सी स्याही
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मेज के एक कोने में पड़े हुये कोरे कागज के कुछ पर्चे और एक पुरानी कलम मैंने आज देखा कि बहुत समय से मेरी बाट जोहते हैं, मैं किसी अद्वित...
1 comment:
Dec 26, 2015
Book Review : 'The Metamorphosis' by Franz Kafka
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'The Metamorphosis' is a novella by Franz Kafka, one of the most influential names in German literature. Most of the works of Fran...
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